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हादसे में हुई मौत की कीमत

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बनारस फ्लाइओवर हादसे में हुई 12 लोगो की मौत, 4 लड़के और 4 लड़कियाँ शादी के लायक थे। सरकार ने सभी (12लोगों) के लिए मुआवजा तय किया 2 - 2 लाख रुपये का लड़कियों के माता पिता को मुआवज़े की रकम से जहाँ कुछ संतोष हुआ वही लड़कों के माता पिता को असंतोष। लड़कों  के अभिभावकों ने यह दावा किया है कि हम हमारे बेटों की शादी पर भी कम से कम 10 लाख से नीचे दहेज नही लेते। और यहाँ उनकी मृत्यु पर भी केवल 2 लाख रुपये, इससे ज्यादा तो उसके पढ़ाई पर डोनेशन दिया था हमने। 😏 वहीं लड़कियों के परिवार वालों की बात करे तो माशाअल्लाह..!👌 कहते हैं न, जो होता है अच्छे के लिए होता है। ससुराल जाती तो बहुत कुछ ले कर जाती अच्छा हुआ ऊपर चली गयी । कुछ देकर तो गयी! 😊

इश्क़ और उसकी छाया

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राजवीर और काव्या बचपन से एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त थे। वे जयपुर के एक छोटे से मोहल्ले में रहते थे और एक ही स्कूल में पढ़ते थे। दोनों का परिवार मध्यमवर्गीय था, लेकिन उनके बीच गहरा प्रेम और सम्मान था। राजवीर बचपन से ही एक होनहार और मेहनती छात्र था। उसने हमेशा से अपने परिवार का नाम रोशन करने का सपना देखा था। वहीं, काव्या एक सजीव, खुशमिजाज लड़की थी, जो जीवन के हर पल को जीना जानती थी। उनकी दोस्ती धीरे-धीरे एक गहरे प्रेम में बदल गई, लेकिन उन्होंने कभी इसे व्यक्त नहीं किया, शायद डर था कि कहीं उनकी दोस्ती टूट न जाए। वर्षों बीतते गए और दोनों अपनी-अपनी पढ़ाई पूरी करके अलग-अलग शहरों में अपने करियर बनाने चले गए। राजवीर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए मुंबई चला गया, जबकि काव्या ने दिल्ली में फैशन डिजाइनिंग का कोर्स चुना। वे एक-दूसरे से दूर तो हो गए, लेकिन उनके दिलों में एक-दूसरे के लिए प्रेम बना रहा। मुंबई में रहते हुए राजवीर को नेहा नाम की एक लड़की से मुलाकात हुई। राजवीर और नेहा बड़े ही मस्ती भरे और खुशमिजाज लोग थे। उनकी मुलाकात एक एंजेल्स पार्टी में हुई, जहां राजवीर ने एक जोक सुनाया। र...

एक मोड़ ज़िन्दगी का

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बड़े दिनों बाद प्रीति और विनोद खुशी खुशी प्रीति के मायके जा रहे थे। मिठाइयां और फल रास्ते से ही ले लिए थे, घर नज़दीक ही था बस पैदल का सफर बाकी था। तभी अचानक आसमान में काली घटाएं छा गई, बादल गरज़ने लगे। दोनों ने अपने कदमों की रफ्तार तेज़ की।  प्रीति ने कहा-लगता है बारिश होगी तभी बारिश शुरू हो गई। और दोनों ने अपनी -अपनी शॉल से सिर को ढका और तेज़ी से भागने लगे। दरअसल सड़क पर चल रहे सभी लोग भागने लगे थे वैसे भी सर्दियों के मौसम में बारिश किसे पसंद है। इसी जल्दबाज़ी में वे दोनों दाएं की जगह बाएं मुड़ गए और पक्की सड़क की तरफ चले गए। तभी कुछ दूर चल कर। प्रीति ने टोका - अरे... यह तो गलत रास्ता है। विनोद ने भी थाह ली और दोनों वापस मुड़ गए। रास्ते में उनका एक सहपाठी मित्र मनोज नज़र आया। प्रीति-वह देखो मनोज जा रहा है , जाओ उससे मिल लो उसका हाल चाल ले लो । विनोद - तुम भी चलो। प्रीति- मैं नहीं जाऊंगी तुम मिल आओ मैं यहीं इंतजार करूंगी। विनोद मनोज के पास पहुंचा। मनोज -अरे... विनोद तुम यहां कहां से... विनोद- मैं तो बस यूं ही, यहीं से गुजर रहा था तो तुम्हें देखा और तुम बताओ तुम तो बड़े आदमी हो गए ह...

अपना देश दिवाली पर

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यह वीडियो हमे भारत मे बने दिए खरीदने की प्रेरणा देता है। पर रात की खूबसूरती बढ़ाने के लिए यहाँ खुद अनगिनत चाइनीज़ लाइटों का प्रयोग किया गया है ।अब ये समझ नही आ रहा है कि इस दिवाली हम भावुक बने या प्रैक्टिकल.... हर साल जब दिवाली आती है तो, मिट्टी के दिये का प्रचार और चीनी लाइटों का बहिष्कार शुरू हो जाता है। क्या सिर्फ 1 दिन मिट्टी के बने दिए खरीद लेने से हमारे देश की गरीबी दूर हो सकती है? अगर हम किसी को पीछे करना है तो हमे खुद को उससे बेहतर बनाना चाहिए, (किसी की बनाई लकीर को छोटा करने के लिए खुद उससे बड़ी लकीर बनानी चाहिए।) और बहुत कुछ है हमारे देश मे जिनका प्रयोग हम अपने घरों को सजाने के लिए कर सकते है। जैसे हम भारतीय हस्तकला से बनी चीज़ो का प्रयोग कर सकते है। झूमर , चिड़िया, फूलदान आदि। इन हस्त कलाओं में हमारे देश के गरीब लोग काफी माहिर है। विदेशी वस्तुओं के लोभ में पड़कर हम अपने देश की काबिलियत को नज़र अंदाज़ किये जा रहे है। फिर हम पूछते है गरीबी कहाँ से आ रही है? अब आती है तकनीक की बात आप खुद सोचिये की आज के समय मे उवभोक्ता को कैसी चीज़े भांति है ?सस्ता, सुंदर, सुरक्षित|दिया खरीदेंगे ...